LEKHA MANJARI For SANSKRIT LITERATURE
Call for Papers
Samprati Vārtāḥ (Śodhamañjarī)
An International Peer-Reviewed /Refereed Research Journal on Indian Knowledge System
🌐 Publishing in: Sanskrit | English | Hindi

Friday, 25 December 2020

 दर्शश्यामास्तुतिः


असावम्बा दीपयन्ती प्रकाशं

विमर्शिनी शम्भुमञ्चेद्धलक्ष्मी:।

प्रसन्नाऽन: सारदा शारदा स्याद्

भूयो भूयो प्रवदान्या परेशी॥१


रमा रामा भैरवी घोरघोरा

श्मशानस्था दक्षिणा भद्रकाली।

क्रीमाहुस्तां शवमालै: शिवाभि-

र्यामीशानं चेतयन्ती नुमस्ताम्॥२


क्रीङ्कारिणीं कालशक्तिं भरन्तीं

भजन्ति यां सर्वसिद्ध्यात्मरूपाम्।

भुक्त्या मुक्त्या मृळयन्तीं प्रपद्ये

समावेशात्मनि वन्द्यां वृणे ताम्॥३


साऽन्तर्बहिर्बहिरन्त: स्फुरन्ती

सा शून्याभा पूर्णिमा पूर्णबिम्बा।

विन्दौ विन्दौ सिन्धुरात्मा वरेण्या

पराम्बिका कापि साऽऽस्तां शरण्या॥४


पञ्चास्यमा पञ्चकृत्यं परेशं

पञ्चास्यं तं भोजयन्त्यर्णपूर्णा।

जीवे जीवे शिवसङ्कल्पजप्ता

जाया शम्भोर्जायतां दर्शदीप्ता॥५


श्यामिकां जगतो हन्त्री 

भद्रा भरतनन्दिनी।

नदन्ती नन्दयन्त्यम्बा 

सिद्धेन्द्राक्षी वृताऽवतात्॥६


वत्स देशराज शर्मा -हिमाचलप्रदेशः ।संपर्कसूत्रम् ८२१९३५९७०६